Home » सच्चे प्रेम का अनचाहा अंत | अभिषेक सिंह

सच्चे प्रेम का अनचाहा अंत | अभिषेक सिंह

शीर्षक –  सच्चे प्रेम का अनचाहा अंत | अभिषेक सिंह

सितंबर 2019 का महीना था, ना ज्यादा गर्मी ना ही ज्यादा ठंडी थी, ग्यारहवी का एक लड़का देव नाम का , कुछ पढ़ रहा था जिसका उम्र लगभग 18 साल रहा होगा, और वही पास में उसकी मम्मी खाना बना रही थी, उसी वक्त उसके फोन पे एक मेसेज की घंटी बजती है ।

जैसे ही ये उठा के देखता है तो उस मेसेज में एक नई लड़की हैलो कोई हाय कर के मेसेज छोड़ा था ।
दरसल देव एक फ़ेसबुक चैट ग्रुप में जुड़ा था , और उसमें बहुत कम ही लोग थे, जो आपस में बहुत अच्छे दोस्त थे ,लेकिन आहना नाम की एक लड़की ने जब उस ग्रुप में एक नई लड़की को जोड़ा तो उस वक्त तक आहना को छोड़कर ना देव और ना ही कोई और उस लड़की को जानते थे, देव भी जवाब में लिखता है,

यस आई-एम हियर तो जवाब में अंशु नाम कि लड़की कहती है, थैंक गॉड कोई तो है ,कैसे हो तुम मैं ठीक हूँ तुम अपना बताओ देव ने झट से उत्तर दिया, धीरे-धीरे धीरे यूं ही बातों का सिल सिला चलता रहा। 

अब ये दोनों कुछ ही दिनों में ग्रुप छोड़ प्रसनल चैट में बातें करने लगे दोनों में दोस्ती इस कदर बढ़ने लगी की ग्रुप के लगभग सभी लोगों से उनका रिश्ता सबसे बनने नही लगा, छोटी-छोटी छोटी बातों पर बहस होने लगा यहाँ तक की आहना से भी कुछ दिन बाद देव को उसी ग्रुप में एक और दोस्त मिल गया जिसका नाम डेविड था।

डेविड आर्मी का तैयारी कर रहे थे और देव से सीनियर थे, तो देव ने उसे सर कहना शुरू कर दिया और दोनों ने आपस में एक दुसरे का नंबर भी बदला उधर अंशु के लिए देव के अंदर एक अलग ही भाव बना हुआ था।

वो अब हमेशा उससे बातें करने का बहाना ढुंढ़ता अंशु भी उससे अच्छे से बात करती थी लेकिन देव यहीं रूकने वाला नही था ।देव समझ गया था की वो अंशु से बात किये बिना एक दिन भी नही रह सकता है ।

लेकिन अंशु को अपने प्यार के बारे में कैसे बताए वो यही सोच में रहता था ,और देव के पास अंशु का कोई नंबर भी नही था देव नंबर मांगने से भी डर रहा था ।कही शुरू होने से पहले ही सब खत्म ना हो जाए इस डर से वो मांग नही पाता, एक दिन किसी बात को ले कर अंशु को ग्रुप में सभी लोग काफी कुछ सुना रहे थे, और अंशु अकेले कुछ समझाने की कोशिश कर रही थी ।

तभी देव की एंट्री होती है और वो जाते ही समझ जाता है की जिसके यादों में वो दिन रात खोया रहता है ,वो अकेले सब से भीड़ गई है बस देव भी अंशु के साथ देने के लिए सामने आ गया और देव के वजह से जल्दी ही सब को शांत होना पड़ा।

लेकिन देव जानता था ये सब इतनी आसानी से बंद नही होगा, उसी दिन सामने से अंशु ने देव से उसका नंबर मांगी देव को खुशी का ठिकाना नही था ।जिस वक्त के लिए वो इतने दिनों से तडप रहा था ,वो वक्त खुद सामने से आया तो लाजिम सी बात है निश्चित ही देव की खुशी उस वक्त सातवे आसमान पर होगी।

लेकिन देव दिमाग़ से काम लेना चाहता था वो जानना चाहता था की अंशु के मन में क्या चल रहा है ।

देव ने पुछा मेरा नंबर का तुम क्या करोगी तो अंशु कहती है यार तुमने जो आज मेरी हेल्प की वो कम नही है तुम अब मेरे बहुत अच्छे दोस्त बन गये हो इसिलिए मैं चाहती हूँ तुम्हारा नंबर मेरे पास रहे लेकिन अगर तुम नही देना चाहते हो तो कोई बात नहीं देव इतना सुनहरा मौका गंवाना नही चाहता था इसिलिए वो बीना सवाल अपना नंबर टाइप कर दिया।

अब दोनों मेसेज से ज्यादा कॉल पे बात करने लगे एक दिन देव ने हिम्मत कर के बोल ही दिया तुम मेरे से कम से कम हर रोज एक बार कॉल पर बात किया करो तुमसे बात कर के मेरा दिन बहुत अच्छा जाता है।

तुमसे बात कर के मेरे अंदर एक अलग ही एनर्जी मिलती है देव कोई भी मौका गंवाना नही चाहता था। इसिलिए वो कोशिश में लगा था। 
लेकिन अंशु फिर भी उसके इशारों को समझ नहीं पाई और हस के बोली आई विल ट्राई देव भी थेंक्स कह के दुसरी बातों में लग गया ताकी देर तक बातें हो सके अब वो हमेशा इस मौके के तालास में रहता था की कब वो अंशु से प्यार का इजहार करेगा। 

लेकिन वो अंशु के गुस्से को भी जानता था की उसकी एक ग़लती सारी उम्मीदों सारी सपनों पे पानी फेर सकती है । इसिलिए उसने धैर्य से काम लिया और सारी बात डेविड को बताया और उससे पुछा अब आप बताओ मैं उससे कैसे ये सारी बात उसे कहूँ, लेकिन कहना भी जरूरी था। 

इसिलिए उसने डेविड को अपनी कहानी सुनाई, मैं अगर तुम्हारा कोई हेल्प कर सकता हूँ तो बताओ डेविड ने पुछा तुम बोलो तो अभी मैं उसे बता दुं लेकिन देव ने ऐसा कुछ भी कहने से मना किया और सही समय का इंतेज़ार करना ही सही समझा इधर दिन पर दिन देव अंशु के और करीब चलता जा रहा था।

देव का प्यार निश्वार्थ था ,उसे नही पता था की अंशु उसे मिलेगी या नही लेकिन फिर भी वो अंशु से बेइंतहा मोहब्बत किया जा रहा था ,उसके साथ जिंदगी का सपना सजाते जा रहा था एक दिन किसी काम से देव से डेविड का नंबर मांगा लेकिन देव ने ये कहते हुए मना कर दिया की उसके पास नंबर नही है वो बस फेसबुक पर ही बात करता है। 

अंशु ने जब सारी बात डेविड को बताई की सच में देव के पास आपका नंबर नही है और वो आज थोड़ा अजिब तरह से बात भी किया , तो डेविड समझ गया की यही सही समय है अंशु को सच्चाई से अवगत कराने का , बस उसने अंशु के सामने देव की सारी कहानी रख दी, लेकिन उसने मुझे तो ऐसा बताया ही नही अंशु ने बीच में डेविड को रोकते हुए बोला मैं ने सुना है लड़कियों के लिए इशारा ही काफी होता है। 

फिर तुमने देव का इशारों से कैसे बच गई सच्चाई यही है की वो तुमसे बहुत प्यार करता है ,इसिलिए वो सीधे तरह से तुमसे इस विषय में कभी कुछ नही बोला ,वो नही चाहता है की तुम्हे बुरा लगे और तुम उससे बातें करना बंद करो, इसिलिए वो अब तक चुप है ,बेहतर होगा तुम उससे एक बार बात करो ,अच्छा सुनो मुझे थोड़ा काम है बाद में मैं तुमसे बात करता हूँ ,इतना बोल के डेविड ने अंशु का फोन कट कर दिया ,अंशु अपना भी काम इन सब बातों में भुल गई थी ।

इधर डेविड ने तुरंत ही देव को फोन लगाया और उसे बताया की मैं अंशु को तुम्हारे बारे में सारा कुछ बता चुका हूँ ,बाकी तुम सभाल लेना देव का मानों एक झटके में सारा सपना चकनाचुर हो गया हो ,वो एकदम शांत हो गया था ।

अब उसे इस बात का डर था की की पता नहीं अंशु उसके बारे में क्या सोच रही होगी? क्या उसकी एक गलती ने उसे अंशु से दुर तो नहीं कर दिया ? ऐसे अनेकों ख्यालात उसके मन में बाढ़ सी उमर परी तीन दिनों तक फिर देव का अंशु से कोई बात नहीं हुई और इन तीन दिनों में देव पीछले 13 साल में जितना नही रोया होगा उससे ज्यादा वो महज तीन दिनों में रो दिया था।

उसे लगा अंशु उससे काफी दुर हो गई हो जहां से सब कुछ ठीक हो इतना आसान नही था ।अंशु भी पीछले तीन दिनों से एक बार भी उससे कोई बात नहीं की थी, और देव में इतनी हिम्मत नही था की वो अंशु को मेसेज या फोन सामने से कर पाते, इन्ही सब यादों और आंसुओं के सहारे, उसे एक अनजान नंबर से फोन आया और उठाते ही सिर्फ़ हलो भर की देरी से समझ गया की सामने वही लड़की है जीससे बात करने के लिए वो पीछले चार दिनों से बैचेन था।

लेकिन उसमें इतना हिम्मत नही था की वो अंशु से बात कर पाता वो बस अंशु की बातों का हाँ या ना में जवाब दे रहा था। अंशु थोड़ा रुआंसा सा हो के कहती है देव ये सब क्या है? यार हम लोग तो बस दोस्त थे, लेकिन तुम उससे उपर चले गये और तुम्हारे अंदर अगर कोई ऐसी बात थी तो तुम मुझे बताते डेविड को क्यूँ बताया ,क्या जरूरत थी ?उसे बताने की देव बस सुनता जा रहा था ,लेकिन जवाब देना भी जरूरी था।

इसिलिए उसने हिम्मत कर के बोलना शुरू किया अंशु ये सच है, मैं ऐसा ही हूँ मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ मैं नही रह सकता हूँ तुम्हारे बिना ,मैं तुम्हे खोने से डरता था ,इसिलिए कभी तुमसे कुछ कहने का हिम्मत नही कर पाया ,और इसिलिए डेविड को बताया लेकिन मैंने उन्हें तुम से इन सब बातों को बताने से मना किया था।

मुझे नहीं पता उन्होने ऐसा क्यूँ किया? अंशु मुझे जो बोलना था वो बोल दिया अब तुम्हारा जो भी फैसला होगा ,मुझे वो मंजुर रहेगा देव तुमने तो मुझे हिला ही दिया पीछले 4 दिनों से काफी सोची लेकिन मुझे अब तक समझ नहीं आया की मैं क्या करूँ ?

अंशु ने देव से पुछा देव ने बड़े सहज स्वाभाव में जवाब दिया अंशु प्रेम को बांधा नही जा सकता है प्रेम पे सबका बराबर अधिकार है जितना मेरा उतना ही तुम्हारा भी इसिलिए तुम्हारी हाँ या ना का तुमको पुर्ण अधिकार है,

फिर तुम्हारा जो भी फैसला होगा वो मुझे मंजुर है ,लेकिन सोचना जरूर अगर हाँ जवाब आए तो कल सुबह पाँच बजे तुम्हारे फोन का इंतेज़ार करूँगा ,अब मैं फोन रखता हूँ बीना अंशु का जवाब सुने देव ने फोन कट कर दिया अंशु को फिर वो सोचने के लिए अकेला छोड़ दिया जबकी देव को इस वक्त उसके साथ रहना था लेकिन अब देव ने प्रसताव रख चुका था इंतेज़ार था ।

बस कल सबेरे का, इधर देव भी बच्चों के तरह जीद ले कर पास के ही एक मंदिर पहुच गया और घुटनों के बल बैठ एक ही बात बोला अगर भगवन मैं सच हूँ और मेरा प्यार सच्चा है, तो कल सिर्फ़ अंशु के तरफ से हाँ ही आना चाहिए।

मिन्नते करते हुए वहां से आ गया और बच्चों के साथ लग गया क्रिकेट में , शाम हुई फिर रात हुई देव को ना भुख थी ना आंखों में नींद और उसे तो ये भी नही पता था की अंशु क्या सोची होगी, उसका क्या फैसला होगा, उसे बस सुबह का इंतेज़ार था ।

पुरी रात करवटे बदलते- बदलते आखिर सुबह हो ही गई जैसे- जैसे घड़ी का सुई पाँच के करीब जा रहा था उसकी धड़कने और तेज होती जा रही थी और जैसे ही पाँच बजा उसके फोन पर घंटी बजती है और स्क्रीन पर एक बरी लाइन का नाम लिखा था coolness of eyes , जिसको सिर्फ़ देखने मात्र से देव की आंखों को ठंडक मिल जाती थी,

देव फोन उठाने के साथ ही कहता है हाँ मुझे पता था तुम हाँ ही कहोगी क्यूँ की मैं ने तुम्हे दिल से चाहा था, दिल से चाहने वाली चीज भला कहाँ जाएगी ।

सब कुछ सुनने के बाद अंशु ने एक लंबी सांस ले के कहना शुरू किया हाँ तुमने सच कहाँ जब से मुझे पता चला तुम मुझसे प्यार करते हो तबसे मैं सिर्फ़ इतना ही सोची हूँ की तुमसे अच्छा इंसान मुझे नहीं मिल सकता है, और सबसे अच्छी बात यह है की हम दोनों एक दुसरे को पहले से जानते भी है ,इसिलिए मुझे लगा तुम मेरे लिए परफेक्ट हो ,

अब हम अपने जीवन का एक नई शुरुआत तुम्हारे साथ करेंगे, अंशु ने भी जवाब दिया हाँ मेरा भी ,दोनों बहुत ही मजे से अपने रिश्ते को आगे बढ़ा रहे थे ।कुछ महीने तक सब कुछ ठीक था, और सही चलता रहा था।

एक दिन अंशु का अचानक मैसेज आता है ,और उसमें लिखा रहता है सुनो मुझे तुमसे कुछ कहना है, अब हमलोग साथ नही रह पाएंगे, मैं अकेली रहना चाहती हूँ ।

यह मेसेज देखते ही देव अवाक हो जाता है देव पुछता है तुम मजाक कर रही हो ना ,अंशु वैसे अच्छा मजाक था, लेकिन अफ़सोस मेरे उपर कोई फर्क नहीं पड़ा। 

नही देव ये कोई मजाक नही है ,ये सच है मैं अब साथ नही रह सकती । देव फिर कहता है मुझे यकिन है की तुम मुझे छोड़ के कही नही जाओगी ,अंशु का जवाब आता है “आर यू क्रेजी “, तो देव पुछता है तुम सच बोल रही हो क्या ? हाँ हाँ हाँ अंशु ने चिढ़ते हुए जवाब दिया, देव रुआंसा सा हो गया और और बोलता है,

मुझे विश्वास नही हो रहा है, तुम ऐसा भी करोगी ,नही देव आज तुम्हे विश्वास करना होगा, मैं सच में जा रही हूँ ,यहाँ पे देव भावनात्मक तरीके से, अंशु को रोकने का कोशिश किया और बोला तुम्हे पता है।

मैं जबसे तुमसे मिला हूँ तबसे तुम्हारे लिए मैं एक डायरी लिख रहा हूँ ,अच्छी बात है आज से मत लिखना और अगर लिखना ही है ,तो उसके आखरी पन्ने में THE END लिखना, और इतना कह कर अंशु Offline चली जाती है।

देव देर तक वहीं रोता रहता है ,और अपने कमरे से वो डायरी लेके अपने छत पे जाता है ,और उसे जला देता है ,जैसे- जैसे वो डायरी जलती है, देव का आंसु ज्यादा होते जा रहा है ,वो उतना ही तेजी से फुट -फुट के रोता है।

लेकिन देव का प्यार बिल्कुल भी नही जला था, वो अब भी अंशु से उतना ही प्यार करता था ,कुछ दिनों तक वो काफी मिन्नते किया गिरगीराया अंशु के सामने लेकिन उसपे इसका कोई असर नही पड़ा, इससे उसका सेहत भी बिगड़ने लगा था ।

क्यूँ की वो कुछ दिनों से ढंग से खाना पीना अच्छे से फालो नही किया था ,वो अलग ही दुनिया में था ,वो बस किसी भी किमत पर अंशु को वापस पाना चाहता था ।

अंत में देव एक दिन एक फेलियर के तरह कहता है । ठीक है जब तुमने मन बना ही लिया है ,तो जाओ लेकिन तुम एक दिन बहुत पछताओगी ,मुझे पता है मैं बहुत पछताउंगी आई एम सॉरी टेक केयर , इसका देव कोई जवाब नही देता है और दोनों यहाँ से अलग हो जाता है।

लेकिन अगर प्यार सफल ना हो और बीन गलती छोड़ जाए तो हमारी सारी अच्छाइयां बेकार है, अंशु के छोड़ जाने के कुछ दिन बाद देव भी सब कुछ भुल आगे बढ़ जाता है।

इस कहानी का अंत ऐसे भी हो सकता था । लेकिन ये कोई फिल्म की कहानी या कल्पना मात्र कहानी नही है ये इस कहानी के लेखक की खुद की कहानी है देव और अंशु काल्पनिक नाम जरूर है, लेकिन इस कहानी के एक एक शब्द मेरे उपर बीती हुई कहानी है, जिसे मैं महसूस किया हूँ , इस दिन को मैं जिया हूँ। 

असल जीवन में कोई किसी का इंतेज़ार नही करता ना और ना ही किसी के लिए वापस आता है। लेकिन मेरे लिए सिर्फ़ साल बदला है इंसान नही मैं आज तक उस कारण का खोज में हूँ जिसने अचानक से सब कुछ बदल दिया और मैं उसका इंतेज़ार कर रहा हूँ और ये देव अंशु का ( काल्पनिक नाम) अनवरत यूं ही वर्षों तक इंतेज़ार करता रहेगा।

पता नहीं कब तक, असल जिंदगी में एंड्राइड फोन के तरह हम ग़लतिया को उस कटे हुए निशान पे उंगली रख बैक नही कर सकते है, हमें उस गलती के साथ ही चलना होता है बीना गलती को बैक किये, मैं बढ़ रहा हूँ उस गलती के साथ उसकी यादों के साथ,उस सच के तलाश में जो सिर्फ़ उसे पता है ।

अभिषेक सिंह

RulingNews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top