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अनुशासन पर निबंध [अनुशासन पर निबंध हिंदी में] | Essay on Discipline in Hindi

अनुशासन पर निबंध [अनुशासन पर निबंध हिंदी में] | Essay on Discipline in Hindi.

हेलो जी, आपका स्वागत है अनुशासन पर निबंध पोस्ट में। अगर आप इंटरनेट पर अनुशासन पर निबंध की तलाश कर रहे हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं।

इस पोस्ट में आपको अनुशासन पर निबंध और अनुशासन से जुड़ी हुई और भी बहुत सारी जानकारी मिलेगी । जैसे अनुशासन पर निबंध , अनुशासन क्यों जरूरी है , अनुशासन पर निबंध कैसे लिखा  जाता है और भी बहुत कुछ।

तो बिना देर किए इस पोस्ट को शुरूकरते हैं ।अगर आपको पोस्ट अच्छा लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ साझा जरूर करिएगा।

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अनुशासन पर निबंध। Essay on Discipline in Hindi.

अनुशासन का शाब्दिक अर्थ शासन का सम्मान करना होता है  अर्थात शासन का सम्मान करना ही अनुशासन कहलाता है। अनुशासन का संधि विच्छेद अनु + शासन होता है जिसमें की अनु का अर्थ सम्मान और शासन का अर्थ मानना होता है ।

अनुशासन एक ऐसी प्रक्रिया है जो की हमारे मन , हमारी आत्मा , हमारा हृदय आदि को पूरी तरह से  नियंत्रित करती है जिससे हमारा मन उधर उधर भटकने की बजाय हमारे नियंत्रण में रहता है जो की जो की हमारे उज्ज्वल भविष्य के लिए हमारे मार्ग में हमारी बहुत ही अधिक सहायता करती है।

यह हमारे माता पिता , बरे बुजुर्ग , शिक्षक आदि के आज्ञा को मानने का हमें आत्मभूति प्रदान करती है जिससे की हमें एक सही दिशा का आभास होता है और उस सही दिशा के मार्ग पर चल कर हम अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने में विजय होने में सफल हो पाते हैं।

प्रस्तावना : जैसा की हम लोग जानते हैं की अनुशासन का अभिप्राय शासन के सम्मान से है अर्थात शासन का सम्मान करना ही अनुशासन कहलाता है।

अनुशासन हमारे लिए या यूं कहें कि सभी के लिए बहुत जरूरी है। यह हमें समय का सदुपयोग करने का ज्ञान देती है जिससे की हम समय पर अपने कार्य को कर पाते हैं और उनमें सफल भी हो जाते हैं।

अनुशासन  हमारे जीवन की एक ऐसी महत्वपूर्ण करी है जिसको चाह कर भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है ।अनुशासन के दायरे में ही हमारा मन, हमारी आत्मा , हमारा हृदय आता है जो की हमें खुद पर नियंत्रण बनाए रखने की अनुमति देता है।

इसके अंतर्गत हमारे बरे बुजुर्ग हमें जो भी कार्य करने को कहते हैं तो वो कार्य यदि हमें किसी कारण बस नही करने को मन रहता है न तो भी उस कार्य को हमें करना ही परता है जो की अनुशासन का एक अच्छा उदाहरण है।

हर एक के जीवन में अनुशासन बहुत जरूरी है।बिना अनुशासन के को भी कभी भी एक खुशहाल और संतुलित जीवन की कल्पना नहीं कर सकता। हमें अपने जीवन में छोटे से छोटा और बरे से बड़ा कार्य को करने ने सीमित समय की आवश्यकता होती है या सीमित समय ही दिया जाता है जो की हमें अनुशासन से ही प्राप्त होती है।

अनुशासन का महत्व। 

अनुशासन सभी के लिए अति आवश्यक है ।यदि हम किसी प्रोजेक्ट पर भी कार्य कर रहे हैं तो वहां भी हमें अनुशासन की आवश्यकता होती है जिसके कारण है जिसके कारण हम उस कार्य में बिना किसी रुकावट के सफल भी हो जाते हैं।

हमारे वरिष्ठों , माता पिता , पूर्वजों , गुरुजनों आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं हमें शासन या अनुशासन को सीखने में और उसे अपनी जिंदगी में लाने में , अपने व्यवहार में उसे समाहित करने में , अपने बोल चाल की भाषाओं को नियंत्रित करने में आदि और भी बहुत कुछ हैं जो की हमें उन्ही सबों से सीखने को मिलती हैं।

हमें हमेशा अनुशासन में ही रहना चाहिए। हमें अपने जीवन में सफल होने के लिए सदेव अपने माता पिता , गुरुजनों आदि की आज्ञा को मानना चाहिए।

हमें सदेव प्रातः काल उठकर अपने दिनचर्या के अनुसार , स्नानादि से निर्वित होकर ही कुछ खाना पीना चाहिए।स्नानादि के पश्चात सर्वप्रथम एक ग्लास गर्म पानी पीना चाहिए , उसके बाद ही चाय या कॉफी पीना चाहिए।

या फिर जो चाय , काफी नहीं पीते तो एक ग्लास गर्म दूध या जूस आदि कुछ भी पी सकते हैं।तत्पश्चात ही नाश्ता में कुछ खाना चाहिए।

हमें विद्यालय भी औपचारिक रूप से तैयार होकर जाना चाहिए। जैसे की साफ वो स्वच्छ स्कूल यूनिफॉर्म पहनना चाहिए , स्कूल बैग में स्कूल की जरूरतों का सारा सामान ले कर स्कूल जाना चाहिए। जैसे कॉपी , कलम या पेंसिल , स्कूल बुक्स आदि जो भी जरूरत की चीजें हैं।

तत्पश्यात लंच भी लेना चाहिए क्योंकि स्कूल में बच्चों को लंच करने के लिए 30 से 45 मिनट का समय दिया जाता है ताकि बच्चे ज्यादा समय तक भूखे न रहें।

क्योंकि ज्यादा समय तक भूखे रहने से भी बच्चों के शारीरिक विकास , मानसिक विकास , सामाजिक विकास अर्थात सर्वांगीण विकास पर काफी गहरा प्रभाव पर सकता है

जिसके कारण बच्चों को उनके जीवन में भविष्य में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पर सकता है।जो की उनके लिए सही बात नही है।

यदि किसी के पास भले ही ज्यादा रुपए पैसे न हो परंतु उनका स्वभाव , बात करने का तरीका , बरों के प्रति सम्मान के भाव आदि रहें तो फिर उस जगह पर उस समय रुपया पैसा बहुत तुछ नजर आने लगता है और ये सब अनुशासन के कारण ही संभव हो पाता है।

निष्कर्ष : अतः उपर्युक्त तथ्यों के माध्यम से अनुशासन और उसके महत्व को बहुत ही अच्छी तरीके से समझा जा सकता है। यह हमारे जीवन की एक ऐसी महत्वपूर्ण करी है जिसको हम चाह कर कर नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं।

यह हमारे जीवन में भटके हुए पथ को सही दिशा प्रदान करने में हमारी सहायता करती है।हमारे जीवन को असफलता से सफलता की ओर ले जाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

जिस प्रकार ज्ञान दान अर्थात अपने ज्ञान को किसी दूसरों में दान करने से उसका प्रचार प्रसार करने से हमारे अंदर मौजूद ज्ञान में कमी नहीं होती है वरन यह और भी ज्यादा बढ़ती जाती है।

ठीक उसी प्रकार अनुशासन को भी अपने जीवन में , अपने व्यवहार में समाहित करने से , अनुशासन को अपनी जिंदगी में महत्व देने से कोई भी इंसान छोटा नहीं होता है वरन वह सबकी नजरों में और भी ज्यादा उपर उठता चला जाता है

और समाज में एक आदर्शवादी व्यक्ति,एक अच्छा इंसान , एक अच्छा व्यक्ति , आदि के रूप में अपना एक अलग ही अस्तित्व बनाने में पूरी तरह से सफल हो जाता है जो की उसके लिए या फिर हमारे समाज के लिए ही एक बहुत ही अच्छी , सम्मान जनक और गर्व की बात है।

अतः हम सभी को अनुशासन के महत्व को समझते हुए उसे अपनी अपनी जिंदगी में, अपने अपने व्यवहारों में आत्मसात करने की आवश्यकता है जिससे की हम सब भी समाज में अपनी अपनी अलग अलग अस्तित्व बना सकें। 

अलग अलग पहचान बना सकें, खुद को पूरी दुनियां के सामने साबित कर सकें की हां हम भी किसी से कम नहीं हैं और धीरे धीरे अपने परिवार, समाज, देश, राष्ट्र आदि के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें जिससे की हमारा देश भी विकासशील देश से विकसित देश बनने की ओर अग्रसर हो सकें जो की हम सबों के लिए एक सम्मान जनक और गर्व की बात है।

अनुशासन पर निबंध 400 शब्दों में।

अनुशासन पर निबंध 400 शब्दों में।
अनुशासन पर निबंध 400 शब्दों में।

जैसा की हमलोग जानते हैं की अनुशासन का तात्पर्य शासन के सम्मान से है। यह हम सभी के जीवन में बहुत ही आवश्यक है। यह हमारे मन, हमारी आत्मा , हमारे हृदय को नियंत्रित करता है जिससे की अगर हम अपने रास्ते से भटक भी जाए तो अनुशासन के जरिए हम अपनी भटकी हुई राहों से वापस आ जाते हैं।

हमें अपने बरे बुजुर्ग , माता पिता , गुरु शिक्षक आदि का हमेशा आदर सम्मान करना चाहिए। उनकी कही हुई हर एक बातों की आज्ञा का पालन करना चाहिए जिससे की उनके द्वारा बताए गए रास्ते पर चल कर हम अपने मंजिल को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

अनुशासन के दायरे में ही हमारा दिनचर्या भी आता है जिसमें की प्रातः काल उठकर स्नानादि से निर्वित होकर चाय , काफी , दूध , जूस , नाश्ता आदि लेना चाहिए। हमें अपना स्कूल भी औपचारिक रूप से तैयार हो कर जाना चाहिए।

जैसे की साफ और स्वच्छ स्कूल यूनिफॉर्म पहनना , सकूल बैग में जरूरतों का सारा सामान लेना जैसे की कॉपी , कलम ,पेंसिल , कलर, सिलेबस के अनुसार बुक्स आदि ले कर ही स्कूल जाना चाहिए। जिससे की हमारी पढ़ाई लिखाई में किसी तरह की बढ़ा उत्पन्न न हो सकें। 

स्कूल जाते समय हमें लंच बॉक्स भी अवश्य लेना चाहिए और लंच बॉक्स में पौष्टिक आहार ही लेना चाहिए। क्योंकि स्कूल में बच्चों को 30 से 45 मिनट का लंच ब्रेक दिया जाता है जो की यह दर्शाता है की बच्चे स्कूल में भी ज्यादा समय भूखे न रहें।

क्योंकि बच्चों को ज्यादा समय तक भूखे रहने से उनके शारीरिक विकास, उनके मानसिक विकास, उनके सामाजिक विकास अर्थात सर्वांगीण विकास पर गहरा असर परता है जो की उनके उज्ज्वल भविष्य को सफल बनाने के मार्ग में बहुत सारी बढ़ाएं उत्पन्न कर सकती हैं।ये सारी प्रक्रियाएं भी अनुशासन के अंतर्गत ही आता है।

अनुशासन न केवल कहने सुनने के लिए एक शब्द है वरन इसे अपने जिंदगी में , अपने व्यवहार में भी समाहित करना चाहिए जो की एक सफल जीवन के लिए परम आवश्यक है।

हमें हमारे आस परोस में अक्सर ऐसे देखने को मिलता है की किसी बरे आदमी का बेटा बहुत ज्यादा पढ़ा लिखा है , उसे किताबी ज्ञान बहुत ज्यादा है परंतु व्यावहारिक ज्ञान में वो फेल है। किसी से बात करने की भी तमीज नही है तो ऐसे ज्ञान का कोई मतलब नहीं रह जाता है

ठीक उसी के विपरित किसी गरीब का लड़का कम ही पढ़ा लिखा है परंतु अपने व्यवहार से सबको खुश कर देता है तो वहां पर ज्यादा पढ़ाई लिखाई भी फीका पर जाति है।

अनुशासन पर निबंध 250 शब्दों में। 

अनुशासन पर निबंध 250 शब्दों में।
अनुशासन पर निबंध 250 शब्दों में।

जैसा की हमलोग बहुत अच्छी तरह से जानते हैं की अनुशासन का तात्पर्य शासन के सम्मान से है। हम सभी के जीवन में अनुशासन ने अपना एक अलग ही स्थान बना लिया है जिसे हम चाह कर भी झुठला नहीं सकते हैं।

हालांकि आज भी बहुत सारे ऐसे व्यक्ति हैं जो की अनुशासन के महत्व को समझ नहीं पा रहे हैं उन्हें नजर अंदाज कर रहे हैं।

अनुशासन के दायरे में हमें बहुत सारी ऐसी चीजें सीखने को मिलती हैं जिसे की हम किसी स्कूल में औपचारिक रूप से नहीं सिख सकते हैं।

अगर हम किसी अनजान जगह पर गए और वहां हम देख रहे हैं की पानी का नल चल रहा है।

वो पानी बिलकुल ही वेस्ट हो रहा है तो हम उस पानी के नल को बंद कर सकते हैं जिससे की पानी को वेस्ट होने से बचाया जा सकता है।ये एक बहुत ही अच्छी आदत है जो की हमें अनुशासन से ही मिलती हैं।

अक्सर हमें यह भी देखने को मिलता है की हम किसी जॉब के लिए इंटरव्यू में गए हुए हैं और वहां बहुत सारे व्यक्ति आए हुए हैं इंटरव्यू देने जो की बहुत ही ज्यादा पढ़े लिखे हैं।

और हम सबके सामने यदि कोई बुजुर्ग अपने लिए किसी प्रकार का मदद मांगने आता है तो वो ज्यादा पढ़ा लिखा व्यक्ति उनकी मदद न कर उनका सबके सामने  मजाक बनाने लगता है जो की एक बहुत ही गलत आदत है।

और यदि कोई उस व्यक्ति की मदद कर देता है तो वो इंटरव्यू देने अंदर जाता तो है परंतु  बिना इंटरव्यू लिए , बिना उसका डॉक्यूमेंट्स देखे, बिना कोई डिग्री देखे तुरंत उसे अपने यहां जॉब में रख लेता है।

तो इससे हमें पता चलता है की अनुशासन और एक अच्छी आदत हमारे लिए कितना जरूरी है।

अनुशासन पर निबंध 150 शब्दों में।

अनुशासन पर निबंध 150 शब्दों में
अनुशासन पर निबंध 150 शब्दों में

जैसा की हम बहुत अच्छे से जानते है की अनुशासन का आशय शासन के सम्मान से है। अनुशासन हमारे लिए बहुत जरूरी है ।इसने हम सब के जीवन में अपना स्थान ऐसे बना लिया है जैसे की मानों हमारी जिंदगी और अनुशासन दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।

अनुशासन ही हमें हमारा बीता हुआ समय , वर्तमान का समय और आने वाले समय का आभास कराती है।यह हमें बताती है की जो बीत गया सो बीत गया परंतु अब आगे जो वर्तमान समय है या फिर आने वाला जो भविष्य है उसको हम कैसे समय का सदुपयोग कर के अच्छा बना सकते हैं।

यह न केवल हमें हमारे जीवन में सही मार्ग प्रशस्त करने में हमारी मदद करती है बल्कि अपने अच्छे अच्छे व्यवहार से सबको खुश रखना भी सिखाती है।हम चाहें भी तो अनुशासन को अपने जिंदगी में नजर अंदाज नहीं कर सकतें।

कोई भी व्यक्ति अनुशासन को अपने जीवन में ग्रहण कर , अपने व्यवहार में आत्मसात कर तुच्छ से महान बन सकता है।

समाज में अपना  एक अलग ही अस्तित्व ,अपनी एक अलग ही पहचान बना सकता है जो की हमारे समाज वो देश के लिए एक बहुत ही सम्मान वो गर्व की बात है।

कोई भी इंसान चाहें कितना भी पढ़ लिख क्यों न लें , कितनी भी डिग्रियां क्यों न प्राप्त कर लें ।परंतु जब तक उसके पास अनुशासन , व्यावहारिक ज्ञान नहीं है तब तक उस इंसान की पढ़ाई लिखाई, डिग्रियां आदि का कोई भी महत्व नहीं है।

अतः हम सबों को अपने अपने जीवन में अनुशासन को अपनाना चाहिए जिससे की हम खुद को , अपने मन को, अपने आत्मा को , अपने हृदय को नियंत्रित कर अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर ध्यान केंद्रित करने ने सफल हो पायेंगे।

जो की हमारे साथ साथ हमारे परिवार वो हमारे देश वो राष्ट्र के लिए भी बहुत ही सम्मान वो गर्व की बात है। 

निष्कर्ष: 

मुझे उम्मीद है की आपको अनुशासन पर निबंध पोस्ट से बहुत कुछ सिखने मिला होगा। अनुशासन पर निबंध से जुड़ी हुई कोई प्रश्न है तो कमेंट के माध्यम से जरूर साझा करे। अगर ये पोस्ट आपको अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर साझा करे धन्यवाद। 

Sonam Kumari

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